शिशुओं की तरह पौधों की भी करें परवरिश: राज्यपाल

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने रेलवे स्टेशन पर आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान कहा कि इंसान ने अपने स्वार्थ के लिए जंगल काटकर पक्षियों के घोंसले तक उजाड़ दिए हैं। जिससें लगातार पर्यावरण बिगड़ता जा रहा है। जो भविष्य के लिए शुभ सकंते नहीं है। उन्होंने कहा कि बिगड़ते पर्यावरण की क्षतिपूर्ति के लिए लोगों को बड़ी मात्रा में सामुहिक रूप से पौधरोपण करना चाहिए। साथ ही इन पौध की परवरिश अपने बच्चों की तरह करनी चाहिए। क्योंकि कल यही पौधे हमें ऑक्सीजन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होंगे।बुधवार को परमार्थ निकेतन और एचडीएफसी बैंक की ओर से वसंत पंचमी के अवसर पर दो लाख पौधारोपण अभियान की शुरूआत हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, मेयर अनिता ममगाईं, एम्स निदेशक प्रो. रविकांत, एचडीएफसी के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार सहित स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि धरती जब अपना परिधान बदलती है तब वसंत आता है। वैसे तो उत्तराखंड में 70 प्रतिशत भूमि पर जंगल हैं। मगर, हमें अपने पूरे राष्ट्र को स्वस्थ रखने के लिए यहां से ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी होगी। इसलिए पौधरोपण करना नितांत आवश्यक है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि दो लाख पौधे रोपने के अभियान में एचडीएफसी ने एक लाख पौध रोप रहा है। इसकी शुरूआत के लिए वसंत पंचमी का दिन चुना गया है। उन्होंने बताया कि पौधों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रो ट्रीज नामक संस्था से अनुबंध किया गया है। इस दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया। सभी अतिथियों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भी भेंट किया। साथ ही रेलवे वाटिका पर पौधारोपण भी किया।
मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए भगीरथ प्रयास करने होंगे। पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण और संवर्धन का भी ध्यान देना होगा।
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि वायु, रेनबो डाइट, व्यायाम, पर्याप्त नींद, सूर्य प्रकाश और स्वच्छ जल सबसे अच्छा डॉक्टर है। इनके बिना मनुष्य स्वस्थ नहीं रह सकता और यह सब हमें प्रकृति और पर्यावरण से प्राप्त होते हैं। एचडीएफसी बैंक उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के प्रमुख संजीव कुमार ने कहा कि उत्तराखंड में एक लाख पौधरोपण हमारे सीएसआर के तहत किया जा रहा है। साथ ही हम लगभग 10 हजार परिवारों को लघु स्तर पर व्यापार के लिये सहयोग प्रदान करते करते हैं।